
नज़्म तुम्हारी बनते हैं...*******चलो ऐसा कुछ करते हैं,एक दर्द अपना रोज़ कहते हैं,तुम सुनते जाना मेरा अफ़साना,एक नज़्म तुम्हारी हम रोज़ बनते हैं !फूल खिलेंगे नज़्मों के,दर्द की दास्ताँ जब पूरी होगी,समेट लेना नज़्म का हर गुच्छा,मेरे दर्द की निशानी है उन फूलों ...
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