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नज़्म तुम्हारी बनते हैं...



परिचय

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नाम : डॉ. जेन्नी शबनम
जन्म तिथि : नवम्बर १६, १९६६
शिक्षा : एम.ए, एल एल.बी, पी एच. डी
व्यवसाय : अधिवक्ता
वर्तमान कार्यरत : कोषाध्यक्ष, अंगिका डेवलपमेंट सोसाइटी, बिहार
सचिव, वी.भी.कॉलेज ऑफ़ एजूकेशन, भागलपुर, बिहार
जन्म-स्थान : भागलपुर, बिहार
स्थायी पता : डी.पी.एस.भागलपुर, दीक्षापुरम, सबौर, भागलपुर- ८१३२१०, बिहार
वर्तमान पता : सर्व प्रिय विहार, नयी दिल्ली - 110016
इ.मेल : jenny.shabnam@gmal.com



नज़्म तुम्हारी बनते हैं...

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चलो ऐसा कुछ करते हैं,
एक दर्द अपना रोज़ कहते हैं,
तुम सुनते जाना मेरा अफ़साना,
एक नज़्म तुम्हारी हम रोज़ बनते हैं !

फूल खिलेंगे नज़्मों के,
दर्द की दास्ताँ जब पूरी होगी,
समेट लेना नज़्म का हर गुच्छा,
मेरे दर्द की निशानी है उन फूलों में !

ऐसा कुछ करना तुम,
रूह छोड़ जाये मुझको जब,
अपनी नज़्मों का एक गुलदस्ता,
मेरी मज़ार पे रोज़ चढ़ा देना सनम !

__ जेन्नी शबनम __ ३०.१०.२००९




प्रतिक्रियाएँ

Re: नज़्म तुम्हारी बनते हैं...
फूल खिलेंगे नज़्मों के, दर्द की दास्ताँ जब पूरी होगी, समेट लेना नज़्म का हर गुच्छा, मेरे दर्द की निशानी है उन फूलों में ! vah ...
Re: नज़्म तुम्हारी बनते हैं...
dil ka dard chipaye nahi chipta aur aaina kabhibhi zoot nahi bolta Dil kadard chipaye nahi chipta najm tumhari banne par dil dard sine me nahi chupta
अस्वीकरण